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पेंड्रा में पुष्य नक्षत्र पर स्वर्णप्राशन संस्कार, 0 से 16 वर्ष तक के बच्चों को पिलाई गई आयुर्वेदिक औषधि

बच्चों के स्वास्थ्य, प्रतिरोधक क्षमता और समग्र विकास को ध्यान में रखते हुए पेंड्रा में पुष्य नक्षत्र के शुभ अवसर पर स्वर्णप्राशन संस्कार का आयोजन किया गया। इस दौरान 0 से 16 वर्ष तक के बच्चों को विशेष आयुर्वेदिक औषधि का सेवन कराया गया।

स्वर्णप्राशन संस्कार

आयुर्वेदिक परंपरा में स्वर्णप्राशन संस्कार को बच्चों के लिए महत्वपूर्ण संस्कार माना जाता है। इसी परंपरा के तहत आयोजित कार्यक्रम में बड़ी संख्या में बच्चों ने हिस्सा लिया। अभिभावकों ने भी बच्चों के स्वास्थ्य और आयुर्वेदिक पद्धति को लेकर रुचि दिखाई।
आत्रेय आयुर्वेद एवं पंचकर्म केंद्र के आयुर्वेद विशेषज्ञ डॉ. मृत्युंजय दत्त शर्मा ने बताया कि स्वर्णप्राशन संस्कार आयुर्वेद की प्राचीन परंपरा से जुड़ा है। आयुर्वेदिक मान्यताओं के अनुसार इसे बच्चों के शारीरिक एवं मानसिक विकास तथा स्वास्थ्य संरक्षण की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना गया है।
पुष्य नक्षत्र को आयुर्वेदिक परंपरा में स्वर्णप्राशन के लिए विशेष अवसर माना जाता है। इसी उद्देश्य से बच्चों को निर्धारित आयु वर्ग के अनुसार आयुर्वेदिक औषधि का सेवन कराया गया।
वही आयुर्वेद विशेषज्ञ ने
अभिभावकों को बच्चों के स्वास्थ्य, पोषण और नियमित देखभाल से जुड़ी जानकारी भी दी गई। आयोजकों का कहना है कि ऐसे आयोजन आयुर्वेदिक जीवनशैली और पारंपरिक स्वास्थ्य पद्धतियों के प्रति लोगों में जागरूकता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

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