
कोटा – हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद की जयंती के उपलक्ष्य में आयोजित कार्यक्रम में यह बताया गया कि खेल और अनुशासन से ही संभव है विद्यार्थियों का सर्वांगीण विकास आज ‘राष्ट्रीय खेल दिवस’ अत्यंत गरिमामय, भव्य एवं उत्साहपूर्ण वातावरण में मनाया गया। इस विशेष कार्यक्रम में खेल के महत्व, शारीरिक शिक्षा तथा विद्यार्थियों के मानसिक एवं चारित्रिक निर्माण पर वक्ताओं ने विस्तार से अपने विचार रखे। कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ अतिथियों द्वारा मेजर ध्यानचंद के तैलचित्र पर माल्यार्पण, पुष्प अर्पित कर एवं दीप प्रज्वलन के साथ किया गया।
कार्यक्रम की शुरुआत में क्रीड़ा अधिकारी राजेश सिंह ने भारत सरकार के निर्देशानुसार खेल दिवस के रूप मनाये जा रहें कार्यक्रम में मेजर ध्यानचंद के प्रेरक जीवन, हॉकी के प्रति उनके अटूट समर्पण, त्याग और संघर्ष की गाथा को विस्तार से प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि किस प्रकार मेजर ध्यानचंद भारत के उत्तर प्रदेश में प्रयागराज में 1905 में जन्मे मेजर ध्यानचंद ग्वालियर रहने लगे वहीं से उन्होंने अंग्रेजी शासन में आर्मी में मेजर के पद पर सेवाएं दी, और भारतीय सेना में भर्ती होकर हॉकी खेलना प्रारंभ किया, उन्होंने विषम परिस्थितियों और सीमित संसाधनों के बावजूद अपने अदम्य अभ्यास एवं एकाग्रता के बल पर भारत को विश्व पटल पर तीन बार ओलंपिक स्वर्ण पदक दिलाया।
क्रीड़ा अधिकारी ने विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा कि मेजर ध्यानचंद का जीवन हमें सिखाता है कि खेल के प्रति सच्ची निष्ठा और निरंतर अभ्यास से असंभव दिखने वाले लक्ष्यों को भी प्राप्त किया जा सकता है।
समारोह की अध्यक्षता कर रही महाविद्यालय की प्राचार्य एवं संरक्षक डॉ. सपना पवार ने अपने प्रेरक उद्बोधन में कहा कि उच्च शिक्षा के साथ-साथ शारीरिक विद्या व खेलकूद विद्यार्थी के संपूर्ण और संतुलित विकास के लिए नितांत आवश्यक हैं। केवल किताबी ज्ञान से व्यक्तित्व का पूर्ण विकास संभव नहीं है; खेल हमें नेतृत्व क्षमता, त्वरित निर्णय लेने का कौशल, अनुशासन और टीम भावना सिखाते हैं। खेल के मैदान में सीखी गई सीख जीवन के हर मोड़ पर एक मजबूत आधार प्रदान करती है।
राजनीति शास्त्र विभाग की प्राध्यापक डॉ. प्रमिला देवी मिरी ने मेजर ध्यानचंद के खेल कौशल और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उनके चमत्कारी प्रदर्शनों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि “स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मस्तिष्क का वास होता है।” एक स्वस्थ, निरोगी और ऊर्जावान शरीर के निर्माण के लिए दैनिक जीवन में योग, खेलकूद और नियमित व्यायाम अत्यंत लाभकारी हैं, जो मानसिक तनाव को दूर कर जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करते हैं।
इतिहास विभाग के सहायक प्राध्यापक अखिलेश पाण्डेय ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि शासकीय निरंजन केशरवानी महाविद्यालय केवल औपचारिक शिक्षा ग्रहण करने का केंद्र नहीं है, बल्कि यह व्यक्तित्व के बहुमुखी एवं सर्वांगीण विकास का केंद्र है। इसमें शारीरिक शिक्षा और खेलकूद गतिविधियों का बहुत बड़ा योगदान होता है। उन्होंने सफलता का मूलमंत्र साझा करते हुए कहा कि सफलता केवल परीक्षा पास करने से नहीं मिलती, बल्कि जीवन के किसी भी क्षेत्र में नियमित, अनुशासित और लगातार किया जाने वाला प्रयास ही सफलता का एकमात्र शस्त्र होता है। आवश्यकता बस इस बात की है कि विद्यार्थी किसी असफलता से हताश न हों और किसी भी कार्य या खेल गतिविधि को अपनी संपूर्ण क्षमता, लगन और ईमानदारी के साथ करें, तो सफलता अवश्य कदम चूमेगी।
भूगोल विभाग के सहायक प्राध्यापक किशोर मिंज ने कहा कि केवल अकादमिक अध्ययन से एक सजग और स्वस्थ मस्तिष्क का निर्माण नहीं हो सकता। स्वस्थ व उर्वर मस्तिष्क के लिए खेलकूद, खेल प्रतियोगिताओं और शारीरिक गतिविधियों में गहरी अभिरुचि होना आवश्यक है। खेल भावना व्यक्ति को जीत में विनम्रता और हार से नई सीख लेकर आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है। विद्यार्थियों के लिए खेल एवं स्वास्थ्य से जुड़ी प्रेरक परिचर्चा का भी आयोजन किया गया, जिसमें छात्र-छात्राओं ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। जिसमे महाविद्यालय के बी ए, बी एस सी, बी कॉम के छात्र-छात्राओं के मध्य कबड्डी प्रतियोगिता का आयोजन किया गया, जिससे सभी ने खूब आनंद और भाग लेने के लिए प्रेरणा लिया।
इस सफल एवं प्रेरणादायी कार्यक्रम में महाविद्यालय के समस्त शैक्षणिक अधिकारी, प्राध्यापक एवं कर्मचारी गण उपस्थित रहे। सभी ने महाविद्यालय के विद्यार्थियों को खेलकूद प्रतियोगिताओं में अधिक से अधिक रुचि लेने, राज्य व राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित किया तथा उनके उज्ज्वल एवं सफल भविष्य की शुभकामनाएं दीं। कार्यक्रम का समापन सभी का आभार प्रदर्शन करते हुए हुआ।



