मरवाही में वन भूमि पर अवैध अतिक्रमण के खिलाफ बड़ी कार्रवाई, प्लांटेशन की जमीन को कराया गया बेजा कब्जा मुक्त
बुधसेन धनुहार के पास पहले से ही स्वीकृत है ‘इंदिरा आवास’, प्लांटेशन क्षेत्र में झोपड़ी बनाकर शासकीय भूमि हड़पने की थी साजिश।
ग्राम पंचायत सरपंच और वन प्रबंधन समिति के अध्यक्ष की मौजूदगी में हटाया गया अवैध कब्जा।
सरपंच मनोज कुमार उदय ने वन विभाग की कार्यशैली की सराहना की, आरोपों को बताया पूरी तरह निराधार।
मरवाही (जीपीएम):
पिछले दिनों वन परिक्षेत्र मरवाही के कटरा बीट के अंतर्गत गाढ़ाढीलान मोहल्ले में आदिवासी परिवार को बेघर करने से जुड़ी एक खबर उजागर की जा रही थी। इस मामले की जमीनी हकीकत और प्रशासनिक जांच में एक बिल्कुल अलग और नया सच सामने आया है। जिसे पीड़ित परिवार के रूप में पेश कर सहानुभूति बटोरने का प्रयास किया जा रहा था, वह दरअसल वन विभाग की शासकीय भूमि और प्लांटेशन (वृक्षारोपण) क्षेत्र पर अवैध कब्जा करने का एक सुनियोजित प्रयास था।
विभागीय सूत्रों और ग्राम पंचायत से मिली आधिकारिक जानकारी के अनुसार, संबंधित व्यक्ति (बुधसेन) धनुहार के पास पहले से ही शासन द्वारा स्वीकृत ‘प्रधानमंत्री आवास’ बना हुआ है और उसका परिवार पूरी तरह से सुरक्षित पक्के आवास में निवास कर रहा है। इसके बावजूद, उक्त व्यक्ति द्वारा ग्राम पंचायत कटरा के अंतर्गत आने वाली मूल्यवान वन भूमि पर अनधिकृत तरीके से बेजा कब्जा करने की नीयत से एक अस्थाई झोपड़ी का निर्माण कर लिया गया था। गौरतलब है कि यह क्षेत्र वन विभाग द्वारा आगामी सघन वृक्षारोपण (प्लांटेशन) के लिए चिन्हित किया गया है, ताकि पर्यावरण को सुरक्षित रखा जा सके।
मामले की गंभीरता को देखते हुए वन परिक्षेत्र मरवाही के अधिकारियों द्वारा स्थानीय जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति में नियमानुसार कार्रवाई की गई। शासकीय भूमि को बेजा कब्जा मुक्त कराने की यह कार्रवाई ग्राम पंचायत कटरा के सरपंच मनोज कुमार उदय और वन प्रबंधन समिति के अध्यक्ष की प्रत्यक्ष मौजूदगी में पूरी पारदर्शिता के साथ की गई।

*सरपंच मनोज कुमार उदय ने आरोपों को नकारा*
मामले में स्थिति स्पष्ट करते हुए ग्राम पंचायत कटरा के सरपंच मनोज कुमार उदय ने बुधराम द्वारा लगाए गए सभी आरोपों को पूरी तरह से निराधार और मनगढ़ंत बताया है। उन्होंने वन विभाग के अधिकारियों की कार्यशैली की सराहना करते हुए कहा कि, ‘’बुधराम के पास पहले से ही रहने के लिए इंदिरा आवास की पक्की व्यवस्था है। वन भूमि और आगामी प्लांटेशन की जगह पर झोपड़ी बनाकर अवैध अतिक्रमण करने का प्रयास किया जा रहा था, जिसे सर्वसम्मति और नियमों के तहत हटाया गया है। वन भूमि पर अतिक्रमण के खिलाफ कार्रवाई करना एक बेहद सराहनीय कदम है और पर्यावरण संरक्षण व शासकीय संपदा की रक्षा के लिए ऐसी कार्रवाई बहुत जरूरी है।”
*बिना नोटिस की कार्रवाई की अफवाहों का खंडन*
आमजन में कुछ तत्वों द्वारा यह भ्रामक चर्चा फैलाई जा रही थी कि यह कार्रवाई बिना किसी पूर्व नोटिस या सूचना के की गई, जो कि गलत है। कानून विशेषज्ञों और विभागीय नियमों के मुताबिक, वन भूमि पर किसी भी प्रकार के तात्कालिक या अवैध अतिक्रमण (जैसे अस्थायी झोपड़ी बनाना) को तत्काल हटाने और वन संपदा को सुरक्षित करने के लिए वन विभाग स्वतंत्र और पूरी तरह कानूनी रूप से सशक्त होता है। बल्कि, ऐसे संवेदनशील मामलों में बिना देर किए त्वरित कार्रवाई करना वन विभाग के अधिकारियों की मुस्तैद कार्यशैली और कर्तव्यनिष्ठा को प्रदर्शित करता है।
*भू-माफियाओं में हड़कंप*
इस बड़ी और निष्पक्ष कार्रवाई के बाद क्षेत्र के सक्रिय भू-माफियाओं और अवैध रूप से वन भूमि पर नजर गड़ाए तत्वों में हड़कंप मच गया है। विभाग के इस कड़े रुख से यह स्पष्ट संदेश गया है कि यदि वन भूमि पर किसी भी प्रकार का बेजा कब्जा करने की कोशिश की जाएगी, तो विभाग के अधिकारी किसी भी दबाव में आए बिना कड़ी कानूनी कार्रवाई अमल में लाएंगे। स्थानीय ग्रामीणों ने भी इस बात पर संतोष व्यक्त किया है कि प्लांटेशन के लिए आरक्षित की गई जमीन अब सुरक्षित है, जिससे क्षेत्र में पर्यावरण संवर्धन को बल मिलेगा।
