
कोटा – जनपद पंचायत कोटा में अध्यक्ष सूरज साधेलाल भारद्वाज के खिलाफ लाया गया अविश्वास प्रस्ताव सोमवार को आवश्यक बहुमत नहीं जुटा सका। दिलचस्प राजनीतिक घटनाक्रम और क्रॉस वोटिंग के बीच अध्यक्ष अपनी कुर्सी बचाने में सफल रहीं। परिणाम घोषित होते ही समर्थकों और कार्यकर्ताओं में उत्साह का माहौल बन गया। जनपद कार्यालय परिसर के बाहर ढोल-नगाड़ों की थाप पर समर्थक झूमते नजर आए, वहीं आतिशबाजी कर एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर जीत का जश्न मनाया गया।

जनपद पंचायत कोटा में कुल 25 सदस्य हैं, जिनमें अध्यक्ष सहित 19 सदस्य भारतीय जनता पार्टी और पांच सदस्य कांग्रेस से जुड़े हैं। अध्यक्ष के खिलाफ भाजपा और कांग्रेस के कुल 22 जनपद सदस्यों ने अविश्वास प्रस्ताव पेश किया था। पिछले कई दिनों से इस प्रस्ताव को लेकर क्षेत्र की राजनीति गरमाई हुई थी और सभी की निगाहें मतदान के परिणाम पर टिकी थीं।

अविश्वास प्रस्ताव की कार्रवाई को रोकने के लिए अध्यक्ष सूरज साधेलाल भारद्वाज ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर मतदान पर स्थगन की मांग की थी, लेकिन न्यायालय से राहत नहीं मिलने के बाद बिलासपुर कलेक्टर के निर्देश पर सोमवार को मतदान की प्रक्रिया संपन्न कराई गई। तखतपुर एसडीएम को निर्वाचन अधिकारी नियुक्त किया गया था, जिनकी देखरेख में पूरी प्रक्रिया शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुई।

मतगणना के दौरान सबसे अहम पहलू क्रॉस वोटिंग का रहा। अध्यक्ष को अपना पद बचाने के लिए न्यूनतम सात मतों की आवश्यकता थी, लेकिन उन्हें नौ मत प्राप्त हुए। वहीं अविश्वास प्रस्ताव के पक्ष में 16 मत पड़े। निर्धारित प्रावधानों के अनुसार प्रस्ताव आवश्यक बहुमत हासिल नहीं कर सका और इस तरह सूरज साधेलाल भारद्वाज अध्यक्ष पद पर बनी रहीं।
परिणाम सामने आने के बाद समर्थकों में खुशी की लहर दौड़ गई। जनपद कार्यालय परिसर के बाहर देर तक जश्न का माहौल बना रहा। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि क्रॉस वोटिंग ने पूरे समीकरण बदल दिए और इसी के दम पर अध्यक्ष अपनी कुर्सी बचाने में सफल रहीं। इस घटनाक्रम के बाद जनपद पंचायत कोटा की राजनीति में नए समीकरणों को लेकर चर्चाओं का दौर भी तेज हो गया है।

