

बिलासपुर – छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक राजधानी बिलासपुर स्थित डॉ. सी. वी. रमन विश्वविद्यालय में चार दिवसीय ‘रमन लोक कला महोत्सव’ का भव्य शुभारंभ हुआ। 13 से 16 फरवरी तक आयोजित इस महोत्सव की थीम “लोक में राम” रखी गई है। महोत्सव के पहले दिन देश के विभिन्न राज्यों से आए लोक कलाकारों ने भगवान राम के जीवन पर आधारित प्रस्तुतियों से वातावरण को भक्तिमय और लोकमय बना दिया।
इस आयोजन में छत्तीसगढ़ के साथ उड़ीसा, पश्चिम बंगाल, बिहार, राजस्थान, झारखंड और असम सहित अनेक राज्यों के कलाकार भाग ले रहे हैं। चार दिनों तक राम के विविध लोक रूपों और परंपराओं को मंच पर जीवंत किया जाएगा।

राम धारण का विषय: डॉ. वर्णिका शर्मा
मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित राज्य बाल संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा ने कहा कि “राम भाषण का नहीं, धारण का विषय हैं।” उन्होंने कहा कि जब हम त्याग और समर्पण का मार्ग अपनाते हैं, वहीं रामायण घटित होती है। राम के आदर्शों को जीवन में उतारना ही सच्ची साधना है।

राम के जीवन से सीखें तप, धैर्य और संगठन: सुशांत शुक्ला
विशिष्ट अतिथि बेलतरा विधायक सुशांत शुक्ला ने कहा कि भगवान राम से हमें तपस्या, संतुलन, संगठन क्षमता और जनभावनाओं का सम्मान करना सीखना चाहिए। उन्होंने कहा कि राम के जीवन से अहंकार और लोभ का त्याग करने की प्रेरणा मिलती है।
धरोहर प्रोजेक्ट की घोषणा

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए विश्वविद्यालय के कुलाधिपति एवं वरिष्ठ साहित्यकार संतोष चौबे ने ‘धरोहर प्रोजेक्ट’ की घोषणा की। इस परियोजना के माध्यम से छत्तीसगढ़ की लोक कला, लोक साहित्य, लोकनाट्य और जनजीवन से जुड़ी परंपराओं का संरक्षण और दस्तावेजीकरण किया जाएगा। साथ ही विश्वविद्यालय में ‘सेंट्रल सेंटर फॉर ट्राइबल रिसर्च’ की स्थापना भी की जाएगी।

उन्होंने कहा कि भारत में 300 से अधिक रामायण रची गई हैं और राम भारतीय संस्कृति की जीवन शक्ति हैं। तुलसीदास ने रामचरितमानस को लोकभाषा में रचकर राम को जन-जन तक पहुंचाया।
लोक कला पर वैचारिक मंथन
महोत्सव के अंतर्गत आयोजित वैचारिक सत्र में रंगकर्मी राकेश तिवारी, वरिष्ठ लोक कलाकार मंत राम यादव और देवार गीत गायिका रेखा देवार ने छत्तीसगढ़ की लोक कला और लोकनाट्य पर विचार रखे। वक्ताओं ने कहा कि लोक संस्कृति ही समाज की असली पहचान है और इसे संरक्षित करना समय की आवश्यकता है।
कर्मा, पंडवानी और भरथरी की मोहक प्रस्तुतियां
कार्यक्रम की शुरुआत मंगलाचरण और सरस्वती वंदना से हुई। तमनार से आए जनक साय और साथियों ने कर्मा नृत्य प्रस्तुत किया। रामनारायण धुर्वे ने मानस गान के माध्यम से राम जन्म प्रसंग को जीवंत किया।
रायपुर से आए राकेश तिवारी दल ने छत्तीसगढ़ी नाट्य प्रस्तुति दी, वहीं चेतन लाल देवांगन ने पंडवानी शैली में रामायण प्रसंग सुनाया। अंत में शकुंतला भारद्वाज और मन्नू राजा की भरथरी प्रस्तुति ने दर्शकों का मन मोह लिया।

स्टॉल और शैक्षणिक प्रदर्शनी
कार्यक्रम स्थल पर शासकीय एवं गैर-शासकीय संस्थाओं द्वारा स्टॉल लगाए गए, जहां योजनाओं और उत्पादों की जानकारी दी गई। विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों ने भी मॉडल और प्रोजेक्ट के माध्यम से अपनी शैक्षणिक गतिविधियों का प्रदर्शन किया।
चार दिवसीय यह महोत्सव छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक संस्कृति को राष्ट्रीय मंच पर स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।



