
छत्तीसगढ़िया अस्मिता और हमारी आध्यात्मिक पहचान गौ माता के सम्मान,सेवा एवं सुरक्षा के बिना अधूरी है

पेंड्रा/कोटमी:-गौरेला पेंड्रा मरवाही जिले के सकोला तहसील में धार्मिक सामाजिक पहल अनुसार गौमाता सम्मान आह्वान अभियान में गौसेवकों ने आज सोमवार को महामहिम राष्ट्रपति महोदय भारत सरकार ,महामहिम प्रधानमंत्री महोदय भारत सरकार सहित छत्तीसगढ़ के राज्यपाल,मुख्यमंत्री महोदय के नाम सकोला तहसीलदार को ज्ञापन सौंपा गया । यह प्रार्थना पत्र (गौसेवक) तहसील प्रभारी श्री चेतराम प्रजापति एवं तहसील सकोला स्तर के गौसेवक क्षेत्रवासियों द्वारा गौ माता के सम्मान में महामहिम राष्ट्रपति महोदया भारत सरकार राष्ट्रपति भवन नई दिल्ली,महामहिम प्रधानमंत्री महोदय भारत सरकार नई दिल्ली,महामहिम राज्यपाल महोदय छत्तीसगढ़ सरकार राजभवन,रायपुर एवं महामहिम मुख्यमंत्री महोदय छत्तीसगढ़ शासन महानदी भवन,नवा रायपुर के नाम प्रार्थना पत्र(ज्ञापन)भारतीय संविधान के अनुच्छेद48 एवं 51A(g)की मूल भावना के अनुरूप अखिल भारतीय वेदलक्षणा गोवंश को राष्ट्रमाता /राष्ट्र आराध्या का संवैधानिक दर्जा प्रदान करने,केंद्रीय गोसेवा मंत्रालय की स्थापना एवं एकीकृत केंद्रीय कानून निर्माण हेतु तथा सम्पूर्ण देशी गोवंश की विधिवत सेवा,पूर्ण सुरक्षा एवं राष्ट्रीय सम्मान हेतु एवं छत्तीसगढ़ राज्य में गोवंश के संरक्षण,संवर्धन एवं वध पर पूर्ण प्रतिबंध हेतु कठोर कानून निर्माण के संबंध में तथा छत्तीसगढ़ राज्य में राज्य माता घोषित करने व राष्ट्रमाता के सम्मान हेतु केन्द्र को अनुशंसा भेजने व राज्य में गो आधारित अर्थव्यवस्था सुदृढ़ करने विषयक ज्ञापन तहसील सकोला तहसीलदार कार्यालय कानूनगो अधिकारी श्री आर.एन. रजक को सौंपा गया ।
ज्ञापन में कहा गया है कि वर्तमान में भारतीय गोवंश की स्थिति अत्यंत पीड़ादायक है।तस्करी,वध(हत्या) एवं सड़कों पर उनकी दुर्दशा देखकर प्रत्येक सनातनी भारतीय का हृदय विदीर्ण है।इसलिए आज सम्पूर्ण राष्ट्र को गोवंश के सम्मान,सुरक्षा और सेवा की प्रतीक्षा है। गो वंश केवल आस्था का विषय नहीं बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था की धुरी भी है। विदित हो कि स्वतंत्रता के समय प्रति व्यक्ति 10 गोवंश की उपलब्धता थी,आज वह घटकर निरंतर प्रति 10 व्यक्ति 1गोवंश के चिंताजनक स्तर तक पहुँच गई है।आज हमारा देशी गोवंश विलुप्ति के कगार पर है जिसके परिणामस्वरूप न केवल हमारी ग्रामीण अर्थव्यवस्था बल्कि भारत की मूल लोकतान्त्रिक और सांस्कृतिक जड़ें भी कमजोर हो रही है।वर्तमान में गो तस्करी,बूचड़खानों में निर्मम वध,सड़कों पर बढ़ती दुर्घटनाओं और नगरीय क्षेत्रों में पॉलीथीन भक्षण के कारण प्रतिदिन लाखों गोवंश काल का ग्रास बन रहा है।छत्तीसगढ़ की संस्कृति और यहाँ के ग्रामीण जनजीवन की कल्पना गो माता के सम्मान,सेवा एवं सुरक्षा के बिना अधूरी है।गौ वंश केवल हमारी श्रद्धा का केन्द्र नहीं अपितु छत्तीसगढ़ के ग्रामीण जनजीवन,कृषि और अर्थव्यवस्था की रीढ़ भी है।छत्तीसगढ़िया अस्मिता और हमारी आध्यात्मिक पहचान गो माता के सम्मान,सेवा एवं सुरक्षा के बिना अधूरी है।छत्तीसगढ़ धान का कटोरा है और गो आधारित प्राकृतिक कृषि ही हमारे अन्नदाता किसानों को रासायनिक खाद के जानलेवा चक्र से मुक्तकर निरोगी और आत्मनिर्भर बनाने का एकमात्र मार्ग है।प्रदेश सरकार के विकास संकल्पों को यदि गो आधारित उत्पादों और जैविक खेती से और अधिक मजबूती से जोड़ दिया जाए तो छत्तीसगढ़ न केवल आर्थिक रूप से समृद्ध होगा बल्कि हमारी आने वाली पीढ़ियों को जहर मुक्त अन्न और सात्विक आहार प्राप्त होगा।गो वंश का संरक्षण वस्तुतः छत्तीसगढ़ के जन स्वास्थ्य और यहाँ की मिट्टी की उर्वरता का संरक्षण है।ज्ञापन में कहा गया है कि भूख,दुर्घटना,तस्करी और क्रूर वध के कारण आज गो वर्धन का प्रभाव क्षीण हो रहा है और हमारे पवित्र देशी गो वंश की संख्या निरंतर घट रही है परन्तु गोवर्धन परिक्रमा के बाद गौ प्रेमियों में पुनः गो के वर्धन की नई आस जगी है।यह अत्यंत विचारणीय विषय है कि भारतीय कृषि और ग्रामीण जीवन का प्राण कहा जाने वाला देशी गो वंश आज भी सड़कों और खेतों में अत्यंत कष्टप्रद स्थितियों में है।
संविधान के अनुच्छेद 48 (राज्य के नीति निदेशक तत्व ) के अंतर्गत स्पष्ट निर्देशित है कि राज्य कृषि और पशुपालन को आधुनिक और वैज्ञानिक प्रणालियों से संगठित करने का प्रयास करेगा तथा विशेष रूप से गायों,बछड़ों और अन्य दुधारु पशुओं के वध पर प्रतिषेध के लिए प्रभावी कदम उठाएगा।आत्मनिर्भर भारत का सपना तब साकार होगा जब हमारा किसान रासायनिक खाद के विषैले चक्र से मुक्त होकर गो आधारित प्राकृतिक कृषि को अपनायेगा।सात्विक आहार अपनाकर निरोग रह सकेगा।
इस धार्मिक सामाजिक अभियान को सफल बनाने में मुख्य रूप से तहसील प्रभारी चेतराम प्रजापति, आशीष श्रीवास्तव,चौथराम टान्डिया,रामकेवल कैवर्त,प्रकाश सिंह ,जगदीश सिंह,सीताराम कैवर्त,निखिल परिहार,पंडित बलराम तिवारी,राम सिंह पोर्ते ,मैकू सिंह पेंद्रो,राणा प्रताप मराबी,नीलचंद पुरी,शिवकुमार यादव,उत्तम राय सहित क्षेत्र के गौपालक गौसेवक किसानभाई उपस्थित रहे।
