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शिक्षकों की हड़ताल में सफाई कर्मचारियों ने संभाली स्कूलों की कमान, प्रार्थना से मध्यान्ह भोजन तक कराई व्यवस्था, 15-16 साल से लंबित मांगों को लेकर जताई नाराजगी

कोटा – प्रदेशभर में शिक्षक-कर्मचारी संगठनों की ओर से विभिन्न मांगों और ‘मोदी की गारंटी’ लागू करने की मांग को लेकर 30 सितंबर को आयोजित हड़ताल का असर स्कूलों में भी देखने को मिला। शिक्षकों के हड़ताल पर रहने के दौरान कई विद्यालयों में स्कूल सफाई कर्मचारियों ने मोर्चा संभालते हुए विद्यार्थियों की आवश्यक व्यवस्थाएं सुचारु बनाए रखने का प्रयास किया।

छत्तीसगढ़ स्कूल सफाई कर्मचारी कल्याण संघ के प्रांत अध्यक्ष संतोष खांडेकर एवं विकासखंड कोटा के ब्लॉक सचिव धर्मेंद्र पात्रे ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर बताया कि शिक्षकों की अनुपस्थिति में सफाई कर्मचारियों ने सुबह से दोपहर तक विद्यालय की विभिन्न व्यवस्थाओं में सहयोग किया। कर्मचारियों ने प्रार्थना से लेकर मध्यान्ह भोजन व्यवस्था तक की जिम्मेदारी संभाली। इसके साथ ही बच्चों की पढ़ाई और अन्य आवश्यक गतिविधियों को व्यवस्थित रखने में भी सहयोग किया।

पहले भी निभा चुके हैं स्कूल की जिम्मेदारी

संघ पदाधिकारियों ने कहा कि शिक्षकों की अनुपस्थिति में स्कूल सफाई कर्मचारियों द्वारा विद्यालय की व्यवस्था संभालना कोई नई बात नहीं है। पूर्व में शिक्षक-कर्मचारियों की करीब 33 दिनों तक चली हड़ताल के दौरान भी सफाई कर्मचारियों ने स्कूलों में व्यवस्थाएं बनाए रखने में भूमिका निभाई थी। संघ का कहना है कि उस समय भी प्रदेश में भाजपा की सरकार थी।

15-16 वर्षों से सेवा, फिर भी समस्याएं बरकरार

संघ ने स्कूल शिक्षा विभाग में कार्यरत सफाई कर्मचारियों की लंबित समस्याओं को लेकर भी नाराजगी जताई। पदाधिकारियों के अनुसार सफाई कर्मचारी पिछले 15 से 16 वर्षों से सेवाएं दे रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद मानदेय में अपेक्षित वृद्धि, समय पर भुगतान सहित कई मांगों का समाधान अब तक नहीं हो पाया है।

संघ पदाधिकारियों का कहना है कि लंबे समय से मांगों का निराकरण नहीं होने के कारण सफाई कर्मचारियों में भी सरकार और प्रशासन के प्रति नाराजगी बढ़ रही है। संघ ने आरोप लगाया कि ‘मोदी की गारंटी’ के तहत 100 दिनों में मांगों के समाधान का भरोसा दिया गया था, लेकिन उनके अनुसार 1000 दिन बीतने के बाद भी मांगें पूरी नहीं हुई हैं।

मांगें पूरी नहीं हुईं तो आंदोलन तेज करने की चेतावनी

संघ ने शासन-प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि निर्धारित समय-सीमा में कर्मचारियों की लंबित मांगों का निराकरण नहीं किया गया तो आंदोलन को जिला, संभाग और प्रदेश स्तर तक तेज किया जाएगा। इसके तहत धरना-प्रदर्शन के साथ मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री, विभागीय मंत्री एवं विधायकों के निवास का घेराव जैसे आंदोलनात्मक कदम उठाने की बात कही गई है।

संघ ने शासन-प्रशासन से स्कूल सफाई कर्मचारियों की लंबित मांगों पर गंभीरता से विचार करते हुए जल्द निराकरण करने की मांग की है।

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