
पेण्ड्रा। प्राच्य संस्कृत विद्यालय संघ छत्तीसगढ़ की ओर से जिला प्रेस क्लब भवन पेण्ड्रा में पत्रकार वार्ता आयोजित की गई। इस दौरान संस्कृत के संरक्षण, संवर्धन और प्रचार-प्रसार को लेकर संघ ने सरकार के समक्ष 10 सूत्रीय मांगें रखीं। पत्रकार वार्ता में संस्कृत बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष स्वामी परमात्मानंद, रामजी श्रीवास, विजया उर्मलिया, ऊषा पवार और सुरेंद्र कुमार शिवहरे उपस्थित रहे।
स्वामी परमात्मानंद ने कहा कि संस्कृत के संरक्षण, संवर्धन और प्रचार-प्रसार से जुड़ना एक पवित्र सारस्वत अनुष्ठान में सम्मिलित होने जैसा है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की संस्कृत पाठशालाओं में विद्यार्थियों की संख्या बढ़ रही है। उत्तर मध्यमा तक संस्कृत शिक्षा प्राप्त करने के बाद विद्यार्थियों को सर्वांगीण विकास के विभिन्न क्षेत्रों में अवसर मिल रहे हैं। ऐसे में संस्कृत शिक्षा की वर्तमान व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ किए जाने की आवश्यकता है।
संघ ने गैर-अनुदान प्राप्त संस्कृत विद्यालयों के शिक्षकों को सम्मानजनक आर्थिक सहयोग देने, संस्कृत पाठशालाओं को गुरुकुल के रूप में विकसित करने के लिए सहायता उपलब्ध कराने, संस्कृत के व्यापक प्रचार-प्रसार, महाविद्यालयों में संस्कृत विषय शुरू करने तथा संस्कृत विद्यामण्डलम की अनुदान राशि में वृद्धि की मांग की।
इसके अलावा संस्कृत संभाषण प्रशिक्षण को बढ़ावा देने, सांस्कृतिक एवं साहित्यिक आयोजनों के लिए सहयोग, संस्कृत अध्यापकों के निरंतर प्रशिक्षण, विद्वानों से मार्गदर्शन की व्यवस्था तथा प्रदेश में नए संस्कृत विद्यालय खोलने के लिए प्रेरक वातावरण तैयार करने की मांग भी संघ ने रखी।
विजया उर्मलिया ने कहा कि संस्कृत को कठिन भाषा के रूप में देखने के बजाय इसे सरल रूप में जनमानस तक पहुंचाने की आवश्यकता है। संघ के सदस्यों ने कहा कि ‘भाषासु मुख्या मधुरा दिव्यागीर्वाण भारती’ के अनुसार संस्कृत भाषाओं में प्रमुख और मधुर भाषा है। वेद, उपनिषद, रामायण, महाभारत और पुराणों सहित ज्ञान-विज्ञान का समृद्ध साहित्य संस्कृत में उपलब्ध है। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति और परंपरा में संस्कृत का महत्वपूर्ण स्थान है तथा इसके संरक्षण और संवर्धन के लिए सामूहिक प्रयास आवश्यक हैं।




