
कोटा – विद्या भारती अखिल भारतीय शिक्षा संस्थान के आह्वान पर आयोजित राष्ट्रव्यापी ‘नमामि भारतम्’ अभियान के अंतर्गत आज सरस्वती शिशु मंदिर रतनपुर के सभागार में सामूहिक ‘संपूर्ण वंदे मातरम गायन’ का भव्य एवं ऐतिहासिक कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। 25 सितंबर 2026 को आयोजित इस महा-अनुष्ठान में पूरे देश के साथ एक ही समय, एक स्वर और एक लय में 155 संभ्रांत नागरिकों, अतिथियों, आचार्यों एवं विद्यार्थियों ने एक साथ संपूर्ण वंदे मातरम का सस्वर गायन किया।

कार्यक्रम का शुभारंभ परम वंदनीय मां भारती एवं ज्ञानदायिनी मां सरस्वती के चित्र के समक्ष मुख्य अतिथि, अध्यक्ष एवं अन्य गणमान्य अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलन एवं माल्यार्पण के साथ हुआ। तत्पश्चात विद्यालय की वरिष्ठ आचार्या कुमारी कीर्ति कहरा द्वारा प्रस्तुत ओजस्वी सामूहिक गीत ने संपूर्ण वातावरण को राष्ट्रभक्ति के भावों से सराबोर कर दिया।
अतिथियों का आत्मीय अभिनंदन
कार्यक्रम में रतनपुर नगर पालिका परिषद के अध्यक्ष माननीय लवकुश कश्यप मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। विशिष्ट अतिथि के रूप में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र रतनपुर के मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. विजय चंदेल, पंढरीनाथ मंदिर रतनपुर के प्रबंधक व धर्म जागरण मंच के संयोजक पंडित आनंद नगरकर, नगर पालिका परिषद की उपाध्यक्ष श्रीमती बिनु निराला एवं एल्डरमैन श्री सुरेश सोनी मंचासीन रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता श्री प्रमोद कुमार अग्रवाल ने की तथा संयोजन डॉ. सुनील जायसवाल (व्यवस्थापक, सरस्वती शिशु मंदिर) द्वारा किया गया। विद्यालय परिवार के सदस्यों, आचार्यों एवं विद्यार्थियों द्वारा सभी अतिथियों का पारंपरिक एवं भावपूर्ण स्वागत किया गया।

वंदे मातरम के ऐतिहासिक महत्व पर ओजस्वी उद्बोधन
कक्षा एकादश के छात्र सर्वज्ञ श्रीवास्तव ने वंदे मातरम के ऐतिहासिक एवं संवैधानिक पहलुओं पर प्रकाश डालते हुए एक प्रभावकारी भाषण दिया। उन्होंने बताया कि स्वतंत्रता आंदोलन में क्रांति की ज्वाला जलाने वाले इस महामंत्र के केवल शुरुआती दो पदों को ही 24 जनवरी 1950 को संविधान सभा द्वारा राष्ट्रगीत का दर्जा मिला, परंतु आज विद्या भारती के इस प्रयास से पूरे देश में संपूर्ण वंदे मातरम का गूंजना एक स्वर्णिम अध्याय है। छात्र के इस ज्ञानवर्धक भाषण की उपस्थित सभी अतिथियों ने मुक्तकंठ से भूरि-भूरि प्रशंसा की।
मुख्य वक्ता पंडित आनंद नगरकर ने अपने संबोधन में कहा कि ‘वंदे मातरम’ केवल छह पंक्तियों का गीत नहीं, बल्कि भारत माता की आराधना का वह सिद्ध मंत्र है जिसने ब्रिटिश हुकूमत की नींव हिला दी थी।

स्वाभिमान और कर्तव्यनिष्ठा का आह्वान
मुख्य अतिथि लवकुश कश्यप ने अपने उद्बोधन में कहा, “आज जब पूरा देश एक साथ वंदे मातरम गाकर इसे विश्व रिकॉर्ड में अंकित करा रहा है, तब इस पावन प्रांगण में उपस्थित होना मेरे लिए अत्यंत गौरव का विषय है। जिस प्रकार स्वतंत्रता संग्राम के समय वंदे मातरम ने जन-जन को एकजुट किया था, आज पुनः यह गीत हमारे भीतर के राष्ट्रीय स्वाभिमान को जगाने का काम कर रहा है।”
कार्यक्रम में उपस्थित रतनपुर थाने की सब-इंस्पेक्टर प्रतिभा पटेल ने विद्यालय की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि केवल सीमा या थाने में रहकर ही देशसेवा नहीं होती, बल्कि अपने-अपने कर्तव्यों का निष्ठापूर्वक पालन करना भी राष्ट्रभक्ति का ही रूप है।
प्रतिकूल मौसम में भी उमड़ा राष्ट्रप्रेम का उत्साह
धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत करते हुए विद्यालय के व्यवस्थापक डॉ. सुनील जायसवाल ने प्रतिकूल मौसम के बावजूद इतनी बड़ी संख्या में उपस्थित हुए प्रबुद्धजनों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि मौसम की तमाम विषमताओं के बीच भी मां भारती के प्रति अनुरागी मन का यह उत्साह यह सिद्ध करता है कि राष्ट्रप्रेम की भावना हर परिस्थिति से ऊपर है।
सफल संचालन एवं गरिमामयी उपस्थिति
इस भव्य एवं गौरवशाली कार्यक्रम का कुशल व सफल मंच संचालन विद्यालय के प्राचार्य मुकेश श्रीवास्तव ने किया।
कार्यक्रम में अनुषांगिक संगठनों के पदाधिकारियों सहित डॉ. चंद्रप्रकाश जायसवाल, भागवत कश्यप, ज्वाला कौशिक, श्रीमती राजकुमारी बिसेन, श्रीमती शिवानी सोनी, पुष्पा तिवारी, संतोष तिवारी, दिनेश प्रभाकर, बिहारी पटेल, प्रहलाद कश्यप, उषा चौहान, प्रमिला, श्रीमती प्रभा मानिकपुरी, श्री योगेश गुप्ता मनी फान्से, श्रीमती वर्षा श्रीवास्तव,सूर्यकांत यदु, माधुरी बैशवाडे, दामिनी श्रीवास, संगीता धीवर, माया कश्यप, स्वाती कश्यप, पूनम देवांगन,जया कश्यप, सुशीला साहू, राजू प्रधान एवं राजेश्वरी कश्यप सहित सैकड़ों की संख्या में अभिभावक तथा नगर के गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का समापन भारत माता की आरती तथा ‘सर्वे भवंतु सुखिनः’ के समवेत गायन के साथ अत्यंत सौहार्दपूर्ण एवं अनुशासित वातावरण में हुआ।




